Motivational stories in hindi-कछुआ और गिलहरी

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Short Motivational stories in hindi

तो दोस्तों आज हम आप लोगो के लिए एक बहुत ही inspirational story लाये है । आज हम लोग के लिए कछुआ और गिलहरी की एक बहुत ही important story ले के आये है। बहुत सरे लोगो के साथ दिक्कत यह आती है की इंटरनेट पर इंग्लिश में तो आप को बहुत साडी आर्टिकल्स मिलेगी पर हिंदी में आप को नहीं मिलता इसी लिए हम आप के लिए motivational stories in hindi लाये है।

कछुआ और गिलहरी –motivational stories in hindi

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कछुआ और गिलहरी की कहानी –

एक तालाब के किनारे जामुन का पेड़ था. उस पेड़ के छोटे से कोटर मे एक गिलहरी रहती थी. सुबह होते ही वह अपने बच्चों के साथ कोटर से बाहर एए जाती और जो भी मितला, उसको अपने बच्चों के साथ बड़े चाव से कहती थी. उसी तालाब मे एक कछुआ बहुत दिनों से रहता था। उसका भी अपना पूरा परिवार था।

वह कछुआ बहुत मोटा और भारी था. जैसे मोटा उसका शरीर था वैसे ही उसकी बुद्धि भी मोटी थी. गिलहरी और कछुआ मे बहुत अच्छी मित्रता थी. आसाढ़ के महीने था और जामुन पकने लगे, तो कछुए का मन लालचा गया. उसने गिलहरी से कहा क्या तुम मुझे दोस्ती के लिए जामुन भी नहीं खिला सकती?

गिलहरी उसकी मीठी मीठी बातों मे या गयी और पके जामुन कछुए को देने लगी, कछुआ जामुन खाता और कुछ अपने बच्चों के लिए लर जाता. कछुवी इन जामुनों को पाकर बड़ी खुश हो जाती और गिलहरी के स्वभाव की तारीफ करती।

एक दिन कछुवी ने गिलहरी को तेजी से भागते हुये पेड़ पर चढ़ते हुए देखा. उसकी नजर लहराती पुंछ और धारीदार कमर पर पड़ी तो देख कर आश्चर्य मे पद गई. और उसके बाद कछुवी ने कछुए से कहा तालाब के राजा मैं आपकी पत्नी हूँ. मेरी इच्छा है कि  मैं भी इस गिलहरी की तरह दौड़ पाती। मुझे लगता है कि यदि मैं इस गिलहरी को मारकर खा जाऊं तो उसके सारे गुण मेरे शरीर मे आ सकती है. आप किसी भी तरह अपनी दोस्त को यहा तक लेकर आ जाओ।

कछुए ने कहा यह काम मेरे लिए जरा भी मुश्किल नहीं है. वह मेरे उपर इतना विश्वास करती है कि  मेरे साथ चली आएगी. तुम्हारी इच्छा तो पूरी करनी पड़ेगी. और कछुआ जामुन खाने के बहाने गिलहरी के पास गया और बोल आजकल बारिश के कारण तालाब पूरी तरह से भर गया है. हमारे परिवार के सदस्य चाहते है कि तुम्हें तालाब की सैर कराया जाए. गिलहरी उसकी बातों मे आ गयी. और उसने कछुए की पीठ पर बैठ कर तालाब की सैर करने की बात मान ली. दोनों तालाब के बीच मे जा पहुचें.

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जब कछुए ने समझ लिया कि गिलहरी यहाँ से भाग नहीं सकती, तो उसने गिलहरी के कहा मुझे अफसोस है कि आज मैं तुम्हें मार कर तुम्हारा मांस अपनी पत्नी को खिला कर उसकी इच्छा को पूरा करूंगा. यह सुन कर गिलहरी ने बिना घबराए कछुए से पूछा – लेकिन क्यों?

कछुए ने कहा क्योंकि मेरी पत्नी बहुत धीरे धीरे चलती है और उसको किसी ने कहा है कि  यदि वह तुम्हारी मांस खा ले, तो वह भी तुम्हारी तरह दौड़ सकती है. इस पर गिलहरी ने कहा तो यह बात है गिलहरी ने चालाकी से हँसते हुये कहा मेरे मित्र  जरा सी बात को तुम कितना तूल दे रहे हो।

अरे मेरे कोटर मे एक गरुड पंख रखा हुआ है, जो भी उस पंख को छू लेता है, वह भी मेरी तरह दौड़ सकता है। यदि तुम मुझे पहले कहते, तो मैं वह पंख तुम्हें दे देती। लेकीन कोई बात नहीं है, मैं अभी तुम्हें वह पंख दे देती हूँ. मूर्ख कछुआ गिलहरी के झांसे मे आ गया और वह वापस जामुन के पेड़ की ओर चल पडा. किनारे के पास पहुचते ही गिलहरी कूद कर पेड़ पर जाकर चढ़ गयी और बोली दुष्ट कछुए जाओ और फिर कभी वापस लौट कर मत आना मेरे पास.

बेचारा कछुआ हाथ मलता रह गया और निराश होकर वापस तालाब मे चला गया.

सीख :- जो प्राणी अपने मित्रों को भी नुकसान पहुचाने मे बाज नहीं आता, ऐसे कपटी और बुरे प्राणियों से भगवान सबको दूर ही रखें।

धन्यवाद TeamHindi

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